संभल हिंसा केस: पुलिस अधिकारियों पर FIR के आदेश पर अखिलेश यादव का तीखा हमला
संभल हिंसा मामले में कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों पर FIR का आदेश दिया। अखिलेश यादव ने बीजेपी और पक्षपाती पुलिस पर हमला बोला, पुलिस ने अपील की बात कही।
संभल हिंसा मामले में अदालत द्वारा तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे पुलिसकर्मियों को बचाने कोई नहीं आएगा, जो सत्ता के इशारे पर काम करते रहे हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ये पुलिस अधिकारी अब अकेले बैठकर भाजपा के “इस्तेमाल करो और फिर छोड़ दो” वाले फार्मूले को याद करेंगे।
“अब कोई बचाने नहीं आएगा” – अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,
“अब कोई बचाने नहीं आएगा। ये पक्षपाती पुलिसकर्मी अब खाली बैठकर याद करेंगे। भाजपा का फ़ॉर्मूला नंबर एक—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो। फ़ॉर्मूला नंबर दो—भाजपाई किसी के सगे नहीं होते।”
उन्होंने यह भी इशारा किया कि सत्ता के करीब रहकर काम करने वाले अधिकारी अंततः अकेले छोड़ दिए जाते हैं।
ज्यादा दरोगाई दिखाना भारी पड़ सकता है: अखिलेश
एक अन्य पोस्ट में अखिलेश यादव ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अब कुछ अधिकारी कोर्ट के आदेश को ही अवैध बता रहे हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या यह न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में नहीं आएगा?
अखिलेश ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सत्ता की खुशामद में जरूरत से ज्यादा “दरोगाई” दिखाना कहीं महंगा न पड़ जाए और माननीय न्यायालय ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करेगी पुलिस
संभल जिले के चंदौसी स्थित न्यायालय ने हिंसा से जुड़े एक मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।
हालांकि पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश को उच्च अदालत में चुनौती देगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, कोर्ट के निर्देश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी।
घायल युवक के पिता की याचिका पर आया आदेश
यह आदेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को पारित किया। यह फैसला उस याचिका पर आया, जो हिंसा में घायल हुए एक युवक के पिता ने दायर की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि युवक को पुलिस की गोली लगी थी।
शिकायत में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन थाना प्रभारी अनुज तोमर और 10 से 12 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है।
पहले ही हो चुकी है न्यायिक जांच: एसपी
संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करेगी क्योंकि मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है।
उन्होंने दोहराया कि कोर्ट के आदेश को चुनौती दी जाएगी।
फिलहाल, अनुज चौधरी फिरोजाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल जिले की चंदौसी कोतवाली के प्रभारी हैं।
क्या है संभल हिंसा का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 19 नवंबर को शुरू हुआ था, जब वकील हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित कुछ हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल जिला अदालत में याचिका दायर की थी।
याचिका में दावा किया गया था कि शाही जामा मस्जिद, पहले से मौजूद हरिहर नाथ मंदिर के ऊपर बनाई गई है।
अदालत के आदेश पर उसी दिन एक सर्वे कराया गया और फिर 24 नवंबर को दूसरा सर्वे किया गया। दूसरे सर्वे के बाद संभल में हिंसा भड़क उठी।
इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई, जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
12 एफआईआर, 2000 से ज्यादा आरोपी
संभल हिंसा के सिलसिले में पुलिस अब तक 12 प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है।
इन मामलों में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क, मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली, अन्य राजनीतिक हस्तियों और 2,000 से अधिक लोगों को नामजद या अज्ञात आरोपी बनाया गया है
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