Epstein Files ने ब्रिटेन में मचाई सनसनी, PM Keir Starmer की कुर्सी पर संकट
नई एपस्टीन फाइलों के खुलासे के बाद ब्रिटेन की राजनीति में भूचाल. पीएम कीर स्टॉर्मर पर इस्तीफे का दबाव, बड़े अधिकारी दे रहे हैं इस्तीफा. पूरा मामला जानें.
जेफरी एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेज़ों के खुलासे ने ब्रिटेन की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है. इस विवाद के कारण सरकार के भीतर इस्तीफों की झड़ी लग गई है और प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की राजनीतिक स्थिति गंभीर संकट में पड़ती दिख रही है. लेबर पार्टी के भीतर भी उनके समर्थन में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे उनकी कुर्सी पर खतरा बढ़ गया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्टॉर्मर जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं.
प्रधानमंत्री बने अभी सिर्फ 18 महीने ही हुए हैं, लेकिन एपस्टीन से जुड़े खुलासों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 8 फरवरी को उनके चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया था, जिनका इस विवाद से सीधा संबंध बताया जा रहा है.
एपस्टीन मामले से स्टॉर्मर कैसे जुड़े?
कीर स्टॉर्मर का नाम सीधे तौर पर एपस्टीन फाइलों में नहीं है, लेकिन उन पर ऐसे व्यक्ति को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने का आरोप है, जिसके संबंध यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से थे. इस व्यक्ति का नाम पीटर मैंडेलसन है.
मैंडेलसन की नियुक्ति की सिफारिश मॉर्गन मैकस्वीनी ने की थी, जिसके बाद बढ़ते दबाव में उन्होंने इस्तीफा दे दिया. जनवरी 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी नई एपस्टीन फाइलों में खुलासा हुआ कि मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच गहरे संबंध थे.
इन दस्तावेज़ों के मुताबिक, 2008-09 की वैश्विक वित्तीय मंदी के दौरान मैंडेलसन ने एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी जानकारी दी थी और उनसे आर्थिक लाभ भी लिया था. इसके बावजूद, स्टॉर्मर ने 2024 में उन्हें अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था, जबकि उनके विवादित संबंध पहले से सार्वजनिक थे.
सितंबर 2025 में स्टॉर्मर ने पहले के खुलासों के चलते मैंडेलसन को बर्खास्त कर दिया था, लेकिन जनवरी 2026 की नई फाइलों ने मामले को और गंभीर बना दिया. इसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी और मैंडेलसन की संपत्तियों पर छापेमारी भी की गई.
जांच के दबाव में मैंडेलसन ने लेबर पार्टी से इस्तीफा दे दिया और हाउस ऑफ लॉर्ड्स से भी हट गए. इसी बीच, सोमवार को प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन ने भी अपना पद छोड़ दिया.
बढ़ता राजनीतिक संकट
यह विवाद अब केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, नैतिकता और राजनीतिक पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है. विपक्ष लगातार स्टॉर्मर पर हमला कर रहा है. प्रधानमंत्री ने एपस्टीन पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने मैंडेलसन पर भरोसा करके गलती की थी.
स्टॉर्मर ने यह भी वादा किया है कि मैंडेलसन की नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने अधिकारियों को गुमराह किया था या नहीं.
पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या मैंडेलसन ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया था. अगर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. हालांकि, अभी तक न तो उन्हें गिरफ्तार किया गया है और न ही उन पर औपचारिक आरोप लगे हैं.
अकेले पड़ते दिख रहे हैं स्टॉर्मर
मॉर्गन मैकस्वीनी, जो 2020 से स्टॉर्मर के सबसे करीबी सहयोगी रहे हैं और 2024 के चुनाव में लेबर की जीत के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं, उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री और कमजोर हो गए हैं.
लेबर पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि मैकस्वीनी के जाने से पार्टी को फिर से भरोसा बनाने का मौका मिलेगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे स्टॉर्मर की स्थिति और अस्थिर हो गई है.
कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने कहा कि स्टॉर्मर ने लगातार गलत फैसले लिए हैं और अब उनकी स्थिति अस्थिर हो चुकी है. कुछ लेबर सांसद भी खुले तौर पर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
अगर स्टॉर्मर पद छोड़ते हैं, तो वह दुनिया के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन सकते हैं, जिन्हें एपस्टीन मामले के कारण सत्ता गंवानी पड़ी हो.
पद संभालने के बाद से ही स्टॉर्मर आर्थिक विकास, महंगाई नियंत्रण और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर संघर्ष करते रहे हैं. उन्होंने कंजर्वेटिव शासन के कथित घोटालों के बाद पारदर्शी सरकार का वादा किया था, लेकिन कई नीतिगत फैसलों पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है.
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