Budget 2026: रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा? जानिए बिल्डर्स की बड़ी उम्मीदेंbudget-2026-real-estate-industry-status-expectations
Budget 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद। उद्योग का दर्जा, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और आसान फंडिंग को लेकर बिल्डर्स की क्या हैं मांगें, जानिए पूरी रिपोर्ट।
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर इस बार रियल एस्टेट सेक्टर की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। रविवार, 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट से बिल्डर्स और डेवलपर्स को कई अहम फैसलों की उम्मीद है, जो सेक्टर की रफ्तार और स्थिरता दोनों को मजबूती दे सकते हैं।
रियल एस्टेट से जुड़े हितधारकों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दे। इसके अलावा जमीन से जुड़े कामकाज को पूरी तरह ऑनलाइन करने, मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने और एक सरल सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की भी अपेक्षा जताई जा रही है।
संगठनों और बिल्डर्स की क्या है मांग?
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े संगठनों और डेवलपर्स का मानना है कि अगर इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिल जाता है, तो उन्हें कम ब्याज दर पर लंबी अवधि के लोन आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, संस्थागत फंडिंग के नए और बेहतर विकल्प भी खुलेंगे।
डेवलपर्स का कहना है कि यह मांग लंबे समय से की जा रही है और अब उन्हें बजट 2026 से ठोस नीतिगत समर्थन की उम्मीद है, जिससे सेक्टर को स्थिरता और दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।
जीडीपी और रोजगार में रियल एस्टेट की अहम भूमिका
मनीकंट्रोल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के संस्थापक और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि रियल एस्टेट सेक्टर वर्तमान में देश की जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र 200 से अधिक सहयोगी उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो बड़ी वित्तीय संस्थाओं से फंडिंग हासिल करना आसान होगा। सही नीतिगत समर्थन मिलने पर यह सेक्टर वर्ष 2047 तक देश की जीडीपी में 15 प्रतिशत तक योगदान देने की क्षमता रखता है और आर्थिक विकास में कहीं अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
वहीं, ट्राइबेका डेवलपर्स ग्रुप के सीईओ रजत खंडेलवाल का कहना है कि इस क्षेत्र को ऐसी स्थायी और स्पष्ट नीतियों की जरूरत है, जिससे घर बनाने वालों और घर खरीदने वालों—दोनों को फायदा पहुंचे। उनके अनुसार, उद्योग का दर्जा मिलने से सस्ती पूंजी और लंबी अवधि का फाइनेंस उपलब्ध होगा, जिससे डेवलपर्स के काम करने के तरीके और प्रोजेक्ट प्लानिंग में सुधार आएगा।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की जरूरत
रियल एस्टेट डेवलपर्स सरकार से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। इस व्यवस्था के तहत विभिन्न सरकारी विभागों से मिलने वाली सभी मंजूरियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
डेवलपर्स का मानना है कि इससे सरकारी प्रक्रियाएं सरल होंगी, प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हो सकेंगे और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, इससे लागत और देरी—दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
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