Indian Army Powerful Regiments: गोरखा, पैरा, राजपूत समेत ये हैं भारतीय सेना की सबसे खतरनाक रेजिमेंट्स
भारतीय सेना की सबसे ताकतवर रेजिमेंट्स कौन सी हैं? गोरखा, पैराशूट, राजपूत, कुमाऊं और बिहार रेजिमेंट की वीरता और इतिहास जानें।
भारतीय सेना को विश्व की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय सैन्य रैंकिंग और आकलनों में भारत की सैन्य ताकत अक्सर शीर्ष चार देशों में शामिल रहती है। अत्याधुनिक हथियार, विशाल संख्या में प्रशिक्षित जवान और कठोर सैन्य अभ्यास भारतीय सेना को हर चुनौती के लिए तैयार रखते हैं।
हालांकि भारतीय सेना की असली शक्ति उसकी कुछ विशिष्ट रेजिमेंट्स में छिपी है, जो अपने अदम्य साहस, युद्ध कौशल और सर्वोच्च बलिदान के लिए जानी जाती हैं। इन रेजिमेंट्स का नाम भर ही दुश्मनों के मन में भय पैदा करने के लिए काफी होता है।
गोरखा रेजिमेंट: निडर योद्धाओं और खुकरी की पहचान
गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित और खतरनाक रेजिमेंट्स में गिनी जाती है। गोरखा सैनिक अपनी निर्भीकता, अनुशासन और असाधारण युद्ध क्षमता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इस रेजिमेंट की स्थापना 24 अप्रैल 1815 को हुई थी।
गोरखा जवानों की पहचान उनका पारंपरिक हथियार खुकरी है, जो नजदीकी युद्ध में बेहद घातक साबित होती है। इनका युद्ध नारा “जय महाकाली, आयो गोरखाली” दुश्मन के हौसले पस्त कर देता है। गोरखा रेजिमेंट की ट्रेनिंग भारतीय सेना की सबसे कठिन ट्रेनिंग में शामिल मानी जाती है।
राजपूत रेजिमेंट: शौर्य और बलिदान की गौरवशाली परंपरा
राजपूत रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित रेजिमेंट्स में से एक है। यह रेजिमेंट वीरता, आत्मसम्मान और बलिदान की समृद्ध परंपरा के लिए जानी जाती है। इसकी स्थापना 1 अगस्त 1940 को फैजाबाद में हुई थी।
कारगिल युद्ध के दौरान राजपूत रेजिमेंट के जवानों ने टोलोलिंग जैसी दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन से डटकर मुकाबला किया और वहां तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया। इसके अलावा जूनागढ़ के भारत में विलय के समय भी इस रेजिमेंट ने अहम भूमिका निभाई। इसका आदर्श वाक्य “सर्वत्र विजय” इसकी युद्ध भावना को दर्शाता है।
पैराशूट रेजिमेंट: आसमान से वार करने वाली स्पेशल फोर्स
पैराशूट रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे खतरनाक और विशिष्ट स्पेशल फोर्स इकाइयों में शामिल है। इस रेजिमेंट के सैनिक हवाई मार्ग से दुश्मन के इलाके में उतरकर अचानक और सटीक हमला करने में माहिर होते हैं।
कारगिल युद्ध के दौरान पैरा रेजिमेंट की 6 और 7 बटालियन ने मुश्कोह घाटी में दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया था। वहीं वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक में भी पैरा कमांडो की भूमिका निर्णायक रही। इस रेजिमेंट की ट्रेनिंग बेहद कठोर होती है, जिसे बहुत कम सैनिक ही सफलतापूर्वक पूरा कर पाते हैं।
कुमाऊं रेजिमेंट: अनुशासन और अदम्य साहस का प्रतीक
कुमाऊं रेजिमेंट भारतीय सेना की एक अत्यंत अनुशासित और साहसी रेजिमेंट मानी जाती है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें 18वीं सदी तक जाती हैं। वर्ष 1794 में इसे रामेंट कोर के नाम से जाना जाता था, जबकि 27 अक्टूबर 1945 को इसका नाम बदलकर कुमाऊं रेजिमेंट रखा गया।
इस रेजिमेंट ने आंग्ल-नेपाल युद्ध सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में भाग लिया है। कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में लड़ने की इसकी क्षमता इसे बेहद प्रभावशाली बनाती है।
बिहार रेजिमेंट: हर परिस्थिति में डटे रहने का जज़्बा
बिहार रेजिमेंट की स्थापना 1 नवंबर 1945 को आगरा में हुई थी। इसकी शुरुआत लेफ्टिनेंट कर्नल आर. सी. म्यूलर के नेतृत्व में की गई थी। यह रेजिमेंट अपने अटूट साहस, धैर्य और जुझारू स्वभाव के लिए जानी जाती है।
बिहार रेजिमेंट ने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया और 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी शानदार प्रदर्शन किया। इस रेजिमेंट के जवान कठिन से कठिन हालात में भी मोर्चा संभालकर डटे रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
भारतीय सेना की असली ताकत
भारतीय सेना की ये रेजिमेंट्स केवल सैन्य इकाइयां नहीं हैं, बल्कि वे साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की जीवंत प्रतीक हैं। इन्हीं वीर रेजिमेंट्स की वजह से भारतीय सेना को दुनिया की सबसे भरोसेमंद और ताकतवर सेनाओं में शामिल किया जाता है।
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