बंगाल वोटर लिस्ट SIR पर सुप्रीम कोर्ट में टकराव: 8,505 माइक्रो ऑब्जर्वर को लेकर EC–राज्य सरकार आमने-सामने
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच तीखी बहस. 8,505 माइक्रो ऑब्जर्वर पर विवाद. पूरा मामला जानें.
पश्चिम बंगाल में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और चुनाव आयोग के वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. सोमवार (9 फरवरी, 2026) को बंगाल सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह चुनाव आयोग को 8,505 माइक्रो ऑब्जर्वर उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, लेकिन चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों की रैंक और प्रशासनिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाए.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. कोर्ट में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान में मुख्यमंत्री के सलाहकार मनोज पंत भी मौजूद थे. उन्होंने चुनाव आयोग की आपत्ति पर कहा कि मौजूदा 294 डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर (DEO) पहले से ही क्लास-A रैंक के अधिकारी हैं, जबकि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नई सूची में शामिल सभी अधिकारी ERO (Electoral Registration Officer) से नीचे की रैंक के हैं.
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. शेषाद्रि नायडू ने मांग की कि राज्य सरकार यह स्पष्ट करे कि ये 8,505 अधिकारी फिलहाल किस पद पर और कहां तैनात हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अधिकारियों को उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उनकी नियुक्ति और भूमिका तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास रहेगा.
नायडू ने यह भी बताया कि मौजूदा माइक्रो ऑब्जर्वर पहले से प्रशिक्षित हैं और अब तक की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं. वे दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं और ERO को आवश्यक मार्गदर्शन दे रहे हैं.
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि नए अधिकारियों को पहले प्रशिक्षण देना होगा, क्योंकि SIR की प्रक्रिया समयबद्ध है. इस पर CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि स्थानीय अधिकारी जमीन की हकीकत बेहतर समझते हैं और नामों में गड़बड़ी जैसे मामलों को अधिक प्रभावी ढंग से पहचान सकते हैं.
हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि कई बार प्रशिक्षित क्लर्क, बिना प्रशिक्षण वाले प्रोफेसर से बेहतर साबित होते हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सूची में शामिल योग्य अधिकारियों को जल्द ट्रेनिंग देकर काम पर लगाया जाएगा. आयोग ने यह भी बताया कि फिलहाल उनके पास 6,500 प्रशिक्षित अधिकारी पहले से काम कर रहे हैं. अगर कुछ और अधिकारी जुड़ते हैं तो अच्छा होगा, लेकिन पहले उनकी उपयुक्तता की समीक्षा जरूरी है.
चुनाव आयोग ने कोर्ट से 48 घंटे का समय मांगा ताकि वह राज्य सरकार की सूची की समीक्षा कर सके, जिसके बाद फिर से सुनवाई हो.
बंगाल सरकार के वकील श्याम दीवान ने कोर्ट से आग्रह किया कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि राज्य की सूची से किसी अधिकारी का नाम न हटाया जाए. इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा.
जब दीवान ने कहा कि 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है, तो CJI ने जवाब दिया कि कोर्ट परिस्थितियों को देखते हुए उचित निर्णय लेगा.
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