वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ट्रंप कानूनी संकट में? संसद को दरकिनार करने पर रुबियो की सफाई से बढ़ा विवाद

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डोनाल्ड ट्रंप गंभीर कानूनी और राजनीतिक सवालों के घेरे में आ गए हैं। कांग्रेस की मंजूरी, अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता को लेकर उठे सवालों ने इस ऑपरेशन को बेहद विवादास्पद बना दिया है।

Jan 5, 2026 - 00:05
 0  2
वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ट्रंप कानूनी संकट में? संसद को दरकिनार करने पर रुबियो की सफाई से बढ़ा विवाद

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद कानूनी और राजनीतिक विवादों में फंसते दिखाई दे रहे हैं। इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद खुलकर उभर आए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

रुबियो ने ट्रंप के उस बयान से दूरी बना ली, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि सत्ता हस्तांतरण पूरा होने तक अमेरिका वेनेजुएला को “चलाएगा।” रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी देश का शासन नहीं संभाल रहा, बल्कि केवल यह सुनिश्चित कर रहा है कि आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाए। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास दबाव बनाने के साधन हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वेनेजुएला में की गई यह कार्रवाई एक सैन्य हमला थी और क्या इसके लिए अमेरिकी संसद की अनुमति जरूरी थी। रुबियो ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई युद्ध या लंबा सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि एक सीमित “लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशन” था, इसलिए कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।

हालांकि यह तर्क ट्रंप प्रशासन के पुराने बयानों से मेल नहीं खाता। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवंबर में व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स ने कहा था कि वेनेजुएला की जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई को युद्ध माना जाएगा और इसके लिए कांग्रेस की अनुमति जरूरी होगी। उस समय प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को यह भी बताया था कि उनके पास जमीनी हमले का कोई वैध कानूनी आधार नहीं है।

इसके बावजूद, कुछ ही महीनों बाद अमेरिका ने वही कदम उठा लिया, जिसे पहले गैरकानूनी बताया जा रहा था। ट्रंप ने खुद इस कार्रवाई को “वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला” करार दिया। इसी ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया। मादुरो पर ड्रग तस्करी, आतंकवाद और अवैध हथियारों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं और फिलहाल वे ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं।

इस कार्रवाई के पीछे दिए जा रहे कानूनी तर्क भी समय के साथ बदलते नजर आए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने दावा किया कि रुबियो ने उन्हें बताया था कि यह कदम अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के लिए जरूरी था, जो गिरफ्तारी वारंट को लागू कर रहे थे। बाद में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और खुद रुबियो ने भी इसी दलील को दोहराया।

आलोचकों का कहना है कि दुनिया में कई ऐसे आरोपी मौजूद हैं जिन पर अमेरिका में केस दर्ज हैं, लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए आमतौर पर किसी संप्रभु देश पर सैन्य कार्रवाई नहीं की जाती। इसी वजह से ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, अमेरिकी संविधान और संसद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

ट्रंप प्रशासन इस कार्रवाई को “कानून लागू करने की प्रक्रिया” बता रहा है, लेकिन खुद ट्रंप के बयान इस दावे को कमजोर करते हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका कुछ समय के लिए वेनेजुएला के प्रशासन में भी भूमिका निभाएगा। उन्होंने बार-बार वेनेजुएला के तेल संसाधनों का जिक्र करते हुए यह संकेत दिया कि अमेरिका वहां के तेल ढांचे को फिर से खड़ा करेगा और देश को “सही तरीके से चलाने” में मदद करेगा।

इन बयानों से यह धारणा मजबूत हो रही है कि मामला केवल मादुरो की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और प्राकृतिक संसाधनों पर प्रभाव जमाने की मंशा भी इसमें शामिल हो सकती है। इसी कारण यह ऑपरेशन अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय कानूनी बहस का विषय बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप प्रशासन कोई ठोस और स्पष्ट कानूनी आधार भी पेश करता, तब भी इस तरह की कार्रवाई को सही ठहराना आसान नहीं होता। अमेरिका ने इससे पहले इराक में सत्ता परिवर्तन के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया था, लेकिन उस युद्ध को संसद की मंजूरी मिली थी। 9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को भी कांग्रेस की सहमति प्राप्त थी, जबकि वेनेजुएला के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

कुछ जानकार इसकी तुलना 1989 के पनामा ऑपरेशन से कर रहे हैं, जब ड्रग तस्करी के आरोपों में राष्ट्रपति मैनुएल नोरिएगा को गिरफ्तार किया गया था। उस समय भी कार्रवाई को सीमित बताया गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी न्याय विभाग ने स्वीकार किया था कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार मौजूद नहीं थे। अब वेनेजुएला के मामले में वही पुरानी बहस एक बार फिर सामने आ गई है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0