‘द केरल स्टोरी’ के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन बोले—केरल से ज्यादा खतरनाक हैं बंगाल के हालात

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को केरल से ज्यादा खतरनाक बताया और कहा कि मौका मिला तो वे इस विषय पर फिल्म बनाएंगे।

Jan 11, 2026 - 03:49
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‘द केरल स्टोरी’ के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन बोले—केरल से ज्यादा खतरनाक हैं बंगाल के हालात

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई मामलों में बंगाल के हालात केरल से भी अधिक खतरनाक नजर आते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अवसर मिला, तो वे पश्चिम बंगाल की परिस्थितियों पर आधारित एक फिल्म जरूर बनाएंगे।

सुदीप्तो सेन हाल ही में गुजरात के सूरत में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने आजतक से विशेष बातचीत में अपनी चर्चित फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ से जुड़े विवादों, केरल और जम्मू-कश्मीर की स्थिति तथा पश्चिम बंगाल की राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मुस्लिम तुष्टिकरण को एक अहम मुद्दा बताते हुए आगामी चुनावों में सत्ता परिवर्तन की संभावना भी जताई।

एक्सक्लूसिव बातचीत में सुदीप्तो सेन ने कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ को लेकर उठा विवाद केवल सिनेमा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक पहलू था। उनके अनुसार केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सत्ता का संतुलन काफी हद तक मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर करता है। उन्होंने इसे एक लंबे समय से चल रहे वैश्विक राजनीतिक खेल का हिस्सा बताया, जिसे वे “इस्लामिक आतंकवाद” से जोड़ते हैं।

उन्होंने बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ‘ISIS Widows’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें पहले ही उजागर हो चुका है कि ISIS की एक सुनियोजित रणनीति थी, जिसके तहत दुनिया भर से महिलाओं को सीरिया और लेबनान ले जाकर आतंकियों की सेवा में लगाया गया। हजारों की संख्या में महिलाएं इस जाल में फंसीं। सेन के अनुसार जब उन्होंने 2012 से केरल में इस विषय पर रिसर्च शुरू की, तो उन्हें पता चला कि उत्तर केरल इस नेटवर्क का एक अहम केंद्र बन चुका था, जिसे अक्सर दबाने की कोशिश की जाती रही।

सेंसर बोर्ड को सौंपे गए सबूत

सुदीप्तो सेन ने बताया कि वर्ष 2011 में केरल विधानसभा में एक सवाल उठाया गया था, जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी और ओमान चांडी मुख्यमंत्री थे। उस समय सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि केरल में हर महीने औसतन 1700 से 2200 लड़कियों का धर्मांतरण हो रहा है। सेन का दावा है कि उनकी रिसर्च के अनुसार यह “मैनिपुलेटिव कन्वर्ज़न” था, जिसमें लड़कियों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सालाना करीब 32,000 मामलों का अनुमान लगाया था, जबकि स्थानीय जानकारों के अनुसार यह संख्या 50,000 या इससे भी अधिक हो सकती है।

निर्देशक के अनुसार उनकी फिल्म उन पीड़ित लड़कियों की सच्ची गवाही पर आधारित है। फिल्म के अंतिम हिस्से में वास्तविक पीड़ितों और उनके परिवारों की कहानियां दिखाई गई हैं—जिसमें अफगानिस्तान की जेल में बंद एक लड़की की मां, आत्महत्या करने वाली लड़की के माता-पिता और गैंगरेप पीड़िता के बयान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास करने से पहले करीब दो महीनों तक हर संवाद और दृश्य का प्रमाण मांगा था। इसके लिए उन्होंने लगभग 200 पन्नों के दस्तावेज और तीन घंटे से अधिक की वीडियो गवाहियां जमा कराईं, जिसके बाद फिल्म को बिना किसी कट के मंजूरी दी गई।

“बंगाल के हालात केरल से ज्यादा गंभीर”

पश्चिम बंगाल को लेकर सुदीप्तो सेन ने कहा कि वहां की स्थिति कुछ मामलों में केरल से भी अधिक चिंताजनक है। उनके अनुसार केरल में ऐसी गतिविधियां परोक्ष रूप से होती हैं, जबकि बंगाल में यह खुले तौर पर दिखाई देती हैं और राजनीतिक तंत्र की भूमिका भी इसमें नजर आती है।

उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में धार्मिक ढांचे और राजनीतिक संरक्षण से जुड़ी खबरें देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए ठीक संकेत नहीं हैं। उनका कहना था कि सत्ता में बने रहने के लिए मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भरता 1947 से चली आ रही एक राजनीतिक रणनीति बन चुकी है।

सुदीप्तो सेन ने सवाल उठाया कि एक लोकतांत्रिक देश में समानांतर कानून व्यवस्था या धार्मिक आधार पर इलाकों का वर्गीकरण कैसे स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे क्षेत्रों में विकास, शिक्षा और स्वच्छता की अनदेखी होती है क्योंकि राजनीतिक दल उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि यदि उन्हें मौका मिला, तो वे पश्चिम बंगाल की परिस्थितियों पर भी फिल्म बनाएंगे। उनके मुताबिक सिनेमा ही उनकी अभिव्यक्ति की भाषा है और वे उसी माध्यम से अपनी बात रखेंगे। उनका मानना है कि केवल मुफ्त सुविधाएं या तुष्टिकरण से देश का विकास संभव नहीं है।

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