US Action on Venezuela: भारत को मिल सकता है 1 अरब डॉलर का फंसा बकाया, तेल आयात की उम्मीद बढ़ी
अमेरिका के वेनेजुएला एक्शन से भारत के लिए राहत की खबर। Venezuelan Oil Sector पर US कंट्रोल से भारत को करीब 1 अरब डॉलर का अटका बकाया मिलने और तेल आयात बहाल होने की उम्मीद।
अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई भारत के लिए राहत भरी खबर साबित हो सकती है। वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित होने की स्थिति में भारत का करीब 1 अरब डॉलर का लंबे समय से फंसा बकाया वापस मिलने की संभावना बढ़ गई है।
हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए सैन्य ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया। उन्हें न्यूयॉर्क स्थित डिटेंशन सेंटर ले जाते हुए एक वीडियो भी सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला के ऑयल सेक्टर पर अमेरिकी पकड़ और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
जहां अमेरिका के इस कदम से रूस समेत कई देशों की चिंता बढ़ी है, वहीं भारत के लिए यह घटनाक्रम फायदे का सौदा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिकी नियंत्रण से भारत को लगभग 1 अरब डॉलर के अटके हुए भुगतान की वसूली का रास्ता खुल सकता है, साथ ही तेल उत्पादन में भी तेजी आने की उम्मीद है।
अमेरिकी नियंत्रण भारत के लिए क्यों फायदेमंद
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेनेजुएला का तेल क्षेत्र अमेरिका के नेतृत्व में पुनर्गठित या संचालित होता है, तो इससे भारत को सीधा लाभ मिलेगा। इससे करीब 1 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 9,000 करोड़ रुपये से अधिक) के लंबे समय से लंबित बकाया का भुगतान संभव हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिकी नियंत्रण के बाद प्रतिबंधों से जूझ रहे वेनेजुएला में भारत से जुड़े तेल क्षेत्रों में कच्चे तेल के उत्पादन में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
ट्रंप का बड़ा दावा
वेनेजुएला पर कार्रवाई के बीच डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में प्रवेश करेंगी और वहां की जर्जर ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी। ट्रंप के मुताबिक, “हम तेल कारोबार को समझते हैं और जानते हैं कि इसे मुनाफे में कैसे बदला जाता है।”
कभी भारत का बड़ा सप्लायर था वेनेजुएला
एक समय भारत वेनेजुएला से कच्चे तेल का बड़ा आयातक था। अपने चरम पर भारत प्रतिदिन 4 लाख बैरल से अधिक तेल वेनेजुएला से मंगाता था। लेकिन 2020 के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और बढ़ते अनुपालन जोखिमों के चलते यह आयात लगभग बंद हो गया।
OVL की फंसी हिस्सेदारी और बकाया
भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल ऑयल ब्लॉक में साझेदारी के तहत संचालन करती है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2020 के बाद से वहां उत्पादन और संचालन लगभग ठप हो गया, जिससे तेल भंडार बेकार पड़ा है और भुगतान अटक गया।
पीटीआई के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में OVL की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर 2014 तक का करीब 53.6 करोड़ डॉलर का डिविडेंड अब तक नहीं मिल सका है। इसके बाद के वर्षों का भुगतान भी लगभग इसी स्तर पर अटका हुआ है। ऑडिट की अनुमति न मिलने के कारण इन बकाया राशियों का निपटान नहीं हो पाया।
भारत की उम्मीद क्यों बढ़ी
भारत को यह उम्मीद इसलिए जगी है क्योंकि अमेरिकी नेतृत्व में वेनेजुएला के तेल निर्यात के दोबारा शुरू होने की संभावना बन रही है। यदि अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी जाती है और वैश्विक बाजार में वेनेजुएला का तेल लौटता है, तो ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को अपना लंबित भुगतान मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। इसके साथ ही भारत के लिए वेनेजुएला से फिर से कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
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